वेदादि शास्त्रों में—सूत्र ग्रन्थों में और तदुपजीवी ज्योतिष शास्त्रों में प्रत्येक शुभाशुभ कर्म के लिए तदनुकूल काल साधन विज्ञानके आधार पर मुहूर्त साधन का विस्तृत विधान विद्यमान है तदनुसार प्रत्येक हिन्दू गर्भाधान आदि संस्कारों की कौन कहे—नूतन वस्त्र पहिनने जैसी छोटी २ क्रियाओं से लेकर मरण तक के लिए सर्व प्रथम बड़ी सावधानी से मुहूर्त सधाता है। आज के इस नास्तिकता पूर्ण वातावरण में भी मुहूर्त साधनेकी प्रवृत्ति पर्याप्त मात्रा में पाई जाती है। विवाह आदि का मुहूर्त न सधने पर, घर में सब सामग्री तैय्यार रहते भी—वह न हो सकेगा यह मर्यादा अभीतक भी यथाकथञ्चित् सुरक्षित है।
क्यों