हम पीछे 'अण्ड-पिण्ड-वाद' की व्याख्या में यह सिद्ध कर चुके हैं कि हमारा यह मानव पिण्ड वस्तुतः ब्रह्माण्ड का ही संक्षिप्त संस्करण है तदनुसार पिण्डको सबल बनाने के निमित्त जितने संस्कार किंवा पौष्टिक शान्ति कृत्य किए जाते हैं उनके लिए ब्रह्माण्डगत मूल स्रोतों की अनुकूलता भी सर्वथा अनिवार्य है। जैसे नगर के प्रत्येक घर में बिजली फिट हो परन्तु यदि पावर हाउस की मूल लाइन बन्द हो तो बत्ती के स्विच को सौ बार दबाने पर भी प्रकाश न होगा, अतः हमारी बत्ती जगने के लिए पावर हाउस की लाइन की अनुकूलता आवश्यक है।
बड़े बड़े नगरों में जहां पानी के नल लगे रहते हैं कभी २ जल संकोच के समय मानुषपालती की ओर से नल खुलने का समय नियत हो जाता है। सो सब जलार्थी अपने २ बर्तन लिए जल खुलने के समय की प्रतीक्षा में घड़ी की ओर ताकते रहते हैं कि कब वह मुहूर्त आए जब बर्तन टूटी के नीचे रक्खा जाए, क्योंकि असमय में टूटी के नीचे बर्तन रखने से कुछ लाभ नहीं। एक देहाती की दृष्टि में बिजली की बत्ती में प्रकाश है परन्तु नागरिक जानता है कि प्रकाश का खजाना तो पावर हाउस है उसी के करन्ट से बत्ती जल सकती है, पंखा चल सकता है, और अमुक यन्त्र में प्रगति आ सकती है। इसी प्रकार वाटर वर्क्स (पानी की प्रधान टंकी) का भेद न जानने वाला मूर्ख ही यह मान सकता है कि दीवार में लगा यह भूतनाथ कान मरोड़ते ही पानी की धारा बहा देता है। परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं है। बिजली के लिए शक्तिभण्डार (पावर हाउस) और जल के लिए जलभण्डार (वाटर वर्क्स) ही सब कुछ हैं।
यद्यपि कई बार हमारी अपनी असावधानी से बत्ती का फ्यूज जल जाने पर या लाटू के विकृत हो जाने पर भी पावर हाउस का करण्ट हमें लाभ नहीं पहुँचा सकता, अतः हमारे अपने यन्त्र का भी ठीक रहना परमावश्यक है, परन्तु उपजीव्य और उपजीवी भाव से पावर हाउस उपजीव्य है और हमारी बत्ती तदुपजीविनी है, उपजीव्य सदा मुख्य होता है। ठीक इसी प्रकार मानवपिण्ड शरीर इन्द्रिय, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, प्राण जीव, आदि जितनी वस्तुएँ हैं ये उपजीवी की भांति किसी विशेष शक्ति द्वारा सञ्चालित यन्त्र मात्र हैं। उनका संचालन करने वाली शक्ति ब्रह्माण्ड में जहां तहाँ व्याप्त है वे ही सब हमारी उपजीव्य है, वैदिक विज्ञान परिभाषा में उन्हींका नाम देवता है।
मुहूर्त इन्हीं ब्रह्माण्ड व्याप्त देवताओं की सानुकूलता परीक्षण की एक विधि मात्र है। जिसके ज्ञान से हम तत्तत् कार्य से संबंध रखने वाली दैवी शक्ति का अपने साथ सामञ्जस्य प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं।