अब प्रश्न उपस्थित होता है कि आखीर अभिवादन करना ही क्यों चाहिए ? इससे क्या लाभ होता है ? क्यों व्यर्थ कवायद परेड की जाय ? इत्यादि प्रश्नों के समाधान से लिए सर्वप्रथम हमें सभी मत-मतान्तरों की प्रणाम विधियों पर तुलनात्मक ढंग से विचार करना होगा, तभी हम वास्तविक तथ्य पर पहुंच पाएंगे।
क्यों